धुंध ने एक घंटे थामी भारत-रूस युद्धाभ्यास की रफ्तारझांसी। पराक्रम और युद्ध कौशल से भरपूर भारतीय सेना और वायुसेना की कार्रवाई में धुंध और कोहरा अभी भी बड़ी बाधा हैं। आपात काल, युद्ध की स्थिति, सर्च ऑपरेशन, राहत-बचाव के दौरान फाइटर हेलीकॉप्टर या प्लेन की लो विजिबिलिटी (दृश्यता कम होना) सैन्य क्षमताओं को तात्कालिक रूप से कम कर रही है। ऐसा ही नजारा भारत-रूस संयुक्त सैन्याभ्यास 'इंद्र 2019' के दौरान मंगलवार को देखने को मिला। धुंध के कारण स्पष्ट दृश्यता न होने से विश्व की दो बड़ी सेनाओं का युद्धाभ्यास एक घंटे देरी से शुरू हुआ।
बबीना छावनी की फील्ड फायरिंग रेंज में मंगलवार सुबह दुश्मन के ठिकानों पर हमले का सैन्याभ्यास करने के लिए भारत और रूस की सेना की टुकड़ियां पूरी तरह तैयार थीं। टी-90 टैंक गरज रहे थे। गोला, बारूद, लांचर सब तैयार थे। शीर्ष अधिकारियों के साथ ही सैनिकों को भी इस अनुभव का बेसब्री से इंतजार था। इसके बावजूद यह अभ्यास मौसम खुलने के बाद एक घंटे से अधिक समय देरी से शुरू हुआ। क्योंकि कार्रवाई के लिए फाइटर हेलीकॉप्टर का इंतजार था। हेलीकॉप्टर से ही कमांडो को मैदान में उतरना था।
धुंध इसमें बड़ी बाधा थी। छावनी फायरिंग रेंज जैसे सुरक्षित और खाली स्थान पर हेलीकॉप्टर को नीचे नहीं लाया जा सका। ऐसे में किसी आपात काल में धुंध या कोहरे के दौरान दुश्मन के इलाके या किसी खास कमांडो ऑपरेशन के वक्त खतरे की गुंजाइश और बढ़ जाती है। बढ़ती आतंकी गतिविधियों और पारंपरिक युद्ध की अपेक्षा सर्जिकल स्ट्राइक और कमांडो ऑपरेशन में फाइटर हेलीकॉप्टरों का महत्व और बढ़ गया है। बबीना छावनी के सैन्य अधिकारियों ने इस संबंध में कुछ भी कहने से मना कर दिया। सेना से जुड़े अन्य अफसरों ने माना कि हर मौसम में ऑपरेशन को संभव बनाने वाले हेप्टर (हेलीकॉप्टर) वक्त की मांग हैं। यह भी कहा कि सेना खराब मौसम में वैकप्लिक प्लान भी रखती है।
अन्सार खान पत्रकार
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