खोखली होती जा रही है ऐतिहासिक इमारतों की नींव

झांसी। खनन के खलनायकों ने बुंदेलखंड के पहाड़ों को छलनी कर डाला है। कानपुर रोड पर स्थित दिगारा की पहाड़ी को भी जगह-जगह से खोद दिया गया है। पहाड़ी की चोटी पर ऐतिहासिक गढ़ी बनी हुई है, जिसकी नींव खनन माफियाओं ने लाल मिट्टी खोदकर हिला डाली। जमीन सपाट कर भवन खड़े कर लिए गए हैं। पुरातत्व विभाग अब अवैध निर्माण साफ कर इसे सुरक्षित करने की बात कह रहा है। दिगारा में पहाड़ी पर गढ़ी का निर्माण चार शताब्दी पहले बुंदेला काल में हुआ था। बाद में इसका इस्तेमाल मराठाओं ने अपनी सुरक्षा चौकी के रूप में किया था। ब्रिटिश काल में इस गढ़ी पर फिरंगी सेना तैनात रहती थी। इसके पुरातात्विक महत्व को देखते हुए राज्य पुरातत्व विभाग ने इसे अपने संरक्षण में ले लिया था। लेकिन, ये संरक्षण कागजों तक ही सीमित रहा, जबकि धरातल पर इस गढ़ी की पहाड़ी पर खनन माफियाओं की नजर जमी रही। वे इससे लगातार लाल मिट्टी निकालते रहे। पिछले चार-पांच सालों के दरम्यान बेतहाशा रूप से पहाड़ी को खोदा गया, जिससे गढ़ी नींव खोखली हो गई और इर्दगिर्द का हिस्सा सपाट मैदान में तब्दील हो गया। भवनों का निर्माण भी तेजी से हुआ और सरकारी तंत्र देखता ही रह गया। विशाल पहाड़ी के नाम पर मिट्टी का टीला ही बचा है, जिससे ऐतिहासिक गढ़ी अपने वजूद के लिए संघर्ष करती नजर आ रही है। बताया जाता है कि पिछले तीन साल में छोटी-बड़ी आठ पहाड़ियां खत्म हो गईं हैं। 
दिगारा की गढ़ी संरक्षित पुरातात्विक इमारत है। इसके इर्दगिर्द की जमीन महिला एवं बाल विकास विभाग के नाम दर्ज है। जल्द ही आसपास किए गए अतिक्रमण को साफ कर गढ़ी को संरक्षित किया जाएगा। 
- डा. एसके दुबे, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी 
खाई में तब्दील हुए खैलार के पहाड़ 
ललितपुर रोड पर स्थित खैलार में किसी जमाने में विशाल पहाड़ हुआ करता था। लेकिन, खनन की वजह ये पहाड़ कई स्थानों पर सपाट मैदान में तब्दील हो गया है। कुछ जगह तो पहाड़ की जगह खाई बन गई है। यहां दर्जनों क्रशर लगे हुए हैं, जिनमें दिन-रात चट्टानों को गिट्टी में बदलने का काम किया जाता है। इससे खनिज विभाग को मोटा राजस्व भले ही मिलता है, लेकिन कुदरत की ये धरोहर धीरे - धीरे अपना अस्तित्व खोती जा रही है।


अन्सार खान पत्रकार 


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