बुंदेलखंड शिक्षा जगत में एक अलग ही पहचान है झांसी शहर की

धर्म, संस्कृति, कलम, कला के साथ-साथ बुंदेलखंड के प्रवेश द्वार झांसी शिक्षा जगत के लिए भी अनूठी नगरी है। पिछले दस सालों में नए-नए संस्थान और पाठ्यक्रम शुरू होने के चलते झांसी की तस्वीर और बदली है। झांसी में कुछ ऐसे संस्थान खुले हैं, जो देश भर में कहीं नहीं हैं। बुंदेलखंड और प्रदेश ही नहीं, देश भर से भी छात्र-छात्राएं पढ़ने के लिए आते हैं।


विशिष्ट कोर्सों से बुंदेलखंड विश्वविद्यालय बना विशेष
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी ही नहीं पूरे बुंदेलखंड का प्रतिनिधित्व करता है। इस विश्वविद्यालय में कई ऐसे कोर्स चल रहे हैं, जो देश-प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालयों में बहुत सीमित स्थानों पर हैं। इसमें आर्किटेक्चर, फॉरेंसिक साइंस, बायोमेडिकल साइंस, होटल मैनेजमेंट, फिजियोथैरेपी कोर्स शामिल हैं। इनमें से कुछ कोर्स प्रदेश में सिर्फ बीयू में ही हैं या कुछ चुनिंदा संस्थानों में चल रहे हैं। इन विशिष्ट कोर्सों से बीयू को अलग पहचान मिली है। विश्वविद्यालय परिसर में दस हजार छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। इसके अलावा यहां पर पांच हजार की क्षमता वाला नवीन परीक्षा भवन बना है, जो कि पूरे बुंदेलखंड में कहीं नहीं है।

बीयू जैसा इनोवेशन सेंटर देश में इक्का-दुक्का
बीयू में स्थित इनोवेशन सेंटर भी अनूठा है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उत्तम शोध, नवोन्मेषी शोधकर्ताओं को प्रशिक्षित करने, शोधकर्ताओं को आधुनिकतम मशीनों की सुविधा प्रदान करने और औद्योगिक संस्थानों के बीच में लिंक स्थापित करने के उद्देश्य से वर्ष 2014 में तत्कालीन कुलपति प्रो. अविनाश चंद पांडेय ने बीयू में इनोवेशन सेंटर शुरू कराया था, जो कि देश का एक उत्कृष्ट शोध संस्थान है। संस्थान में उच्च शोध से संबंधित उपकरण जैसे एक्सरे डिफ्रेक्टोमीटर, गैसक्रोमैटोग्राफमासस्पेक्ट्रोमीटर, फिजिकल क्वांटिटी मेजरमेंट सिस्टम, टनलिंग माइक्रोस्कोप, रियल टाइम पीसीआर, 2डी जेल एलेक्ट्रोफॉसिस, मल्टीमोड माइक्रोप्लेट रीडर, अल्ट्रासॉनिकेटर, सेल कल्चर फैसिलिटी आदि हैं। हाल ही में इनोवेशन सेंटर की उपकरण सुविधा को दृष्टिगत रखते हुए यूजीसी ने उत्तर प्रदेश में सिर्फ बीयू को स्ट्राइड स्कीम के अंतर्गत 61 लाख की परियोजना स्वीकृत की है। इसके तहत तीन सालों में 200 शोधार्थियों को उत्तम शोध करने के लिए तैयार किया जाएगा।

देश भर का एकमात्र ग्रासलैंड झांसी में
देश का एक मात्र भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान (ग्रासलैंड) झांसी में स्थित है। इसकी स्थापना सन् 1962 में हुई थी। झांसी में इस संस्थान की स्थापना करने का मुख्य कारण यहां सभी प्रमुख घासों का पाया जाना था। वर्ष 1966 में इसका प्रशासनिक नियंत्रण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली को सौंपा गया। संस्थान द्वारा चारा उत्पादन व उपयोग के विभिन्न पहलुओं पर अनुसंधान कर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसका प्रचार-प्रसार करता है। इसके अलावा संस्थान में अखिल भारतीय चारा समन्वित परियोजना का संचालन भी होता है। साथ ही संस्थान के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए देश-विदेश के सहयोग से अन्य परियोजनाएं संचालित होती हैं। जलवायु और कृषि की क्षेत्रीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर भारत के अन्य भागों में इस संस्थान के चार क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र स्थापित किए गए हैं, जो राजस्थान के अंबिका नगर, कर्नाटक के धारवाड़ और हिमाचल प्रदेश के पालमपुर, जम्मू कश्मीर के श्रीनगर में स्थित हैं। ग्रासलैंड में देश-विदेश से प्रशिक्षण के लिए लोग आते हैं।

ग्रासलैंड के मुख्य लक्ष्य
- चारा फसलों के आनुवांशिक संसाधनों का संकलन, संवर्धन, संग्रहण और उन्नत किस्मों का विकास।
- चारा फसलों एवं चरागाहों के विकास, उत्पादन एवं उपभोग पर आधारभूत तथा योजनाबद्ध अनुसंधान।
- चारा फसलों एवं चरागाहों पर होने वाले अनुसंधान कार्यों का समन्वयन एवं संकलन।
- चारा फसलों एवं चरागाहों के क्षेत्र में विशेषज्ञता एवं सलाह उपलब्ध कराना।
- पशुपालन व्यवसाय के लिए मानव संसाधन का विकास एवं तकनीकी स्थानांतरण।

प्रदेश का सबसे बड़ा इंजीनियरिंग संस्थान झांसी में
बुंदेलखंड अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (बीआईईटी) क्षेत्रफल के मामले में प्रदेश के सभी सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में सबसे बड़ा है। यह 240 एकड़ में फैला हुआ है। यहां पर अधिकांश संकायाध्यक्ष आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से डॉक्टरेट या मास्टर डिग्री करे हैं। यहां से पढ़े हुए कई छात्र विदेशों में विश्व स्तरीय कंपनियों में सेवारत हैं। संस्थान में राष्ट्रीय स्तर का बैडमिंटन और बास्केटबॉल कोर्ट है। खेलकूद के लिए बेहतर आउटडोर मैदान है। इस कॉलेज में प्रवेश पाने के लिए छात्र-छात्राओं में काफी होड़ रहती है। कुछ समय पहले यहां के छात्र गो कार्ट फॉर्मूला-वन रेस तैयार कर प्रतिभाग कर चुके हैं।

राष्ट्रीय महत्व का देश का पहला केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय
झांसी में राष्ट्रीय महत्व का देश का पहला केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय भी है। इसमें देश भर के छात्र-छात्राएं पढ़ाई करते हैं। इससे पहले मणिपुर में केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय खुला था, उसमें पूर्वोत्तर के छात्र-छात्राएं ही प्रवेश ले सकते हैं। झांसी केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के बाद बिहार में भी खुला। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में मौजूदा समय में स्नातक के तीन कोर्स डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर, डिपार्टमेंट ऑफ हॉर्टीकल्चर, डिपार्टमेंट ऑफ फॉरेस्टी खुले हैं। तीनों मे 112 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इसके अलावा पीजी में इकोनॉमी, जेनेटिक प्लांट बीडिंग, प्लांट पैथोलॉजी, एंटोमोलॉजी, सायल साइंस, वेजिटेबल साइंस, फ्रूट साइंस, एग्रोफॉरेस्टी कोर्स चल रहे हैं। इनमें 37 विद्यार्थी पढ़ते हैं। कृषि विश्वविद्यालय में छात्र-छात्राएं बीजों पर शोध करते हैं। इसके अलावा विश्वविद्यालय किसानों को उन्नत बीज उपलब्ध कराता है, ताकि उनकी उपज बढ़ सके।

पूर्ण सुविधाओं से लैस एकमात्र पैरामेडिकल कॉलेज
पूरे प्रदेश में पूर्ण सुविधाओं से लैस एकमात्र पैरामेडिकल कॉलेज भी झांसी में ही है। कानपुर रोड पर बने इस कॉलेज में डिप्लोमा इन डायलिसिस, डिप्लोमा इन फिजियोथैरेपी, डिप्लोमा इन सीटी स्कैन, डिप्लोमा इन एमआरआई कोर्स चल रहे हैं। इन कोर्सों में 30-30 सीटें हैं। वहीं, बीएससी नर्सिंग भी शुरू हो चुका है। इसमें 40 सीट हैं। यहां पर प्रवेश को लेकर होड़ रहती है। मौजूदा समय में सभी कोर्सों की सीटें भरी हैं।


एडिटर अन्सार खान पत्रकार


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