34 साल पहले झांसी से लंदन गए सीपरी बाजार निवासी बलविंदर सिंह वैसे तो गाहे-बगाहे यहां आते रहे हैं, लेकिन होली पर ढाई दशक बाद वे झांसी आए हैं। पुराने दोस्तों का प्यार और गुझिया की मिठास उन्हें झांसी खींच लाई। अब हर होली पर उन्होंने झांसी आने की इच्छा जताई है।
लंदन में खुद का व्यवसाय
बुंदेलखंड महाविद्यालय से शिक्षा ग्रहण करने के बाद सीपरी बाजार निवासी बलविंदर सिंह लंदन चले गए थे। वहां उनका खुद का व्यवसाय है। परिवार भी उनके साथ ही लंदन में रहता है। लेकिन कई रिश्तेदार झांसी में रहते हैं। गाहे-बगाहे उनका झांसी आना-जाना रहा। लेकिन पिछले पच्चीस सालों से वे होली पर झांसी नहीं आ पाए, जबकि हर होली पर उनका मन झांसी के लिए मचलता था।
किसी न किसी कारण से उनकी यात्रा टल जाती थी। लेकिन इस बार होली झांसी में मनाने की उन्होंने महीनों पहले तैयारी कर ली थी। होली के दो दिन पहले वे झांसी पहुंच गए थे। पुराने दोस्तों के साथ खूब होली खेली और गुझिया का खूब लुत्फ उठाया ।
लंदन में झांसी जैसी गुझिया नहीं
बलविंदर ने बताया कि पच्चीस साल पहले होली पर खूब हुल्लड़ होता था, लेकिन अब त्योहार गुलाल पर सिमट कर रह गया है। हालांकि, समय के साथ ये बदलाव जरूरी है। उन्होंने कहा कि लंदन में सबकुछ मिलता है, लेकिन झांसी जैसी गुझिया नहीं। इस होली पर गुझिया का भरपूर लुत्फ उठाया। उन्होंने बताया कि वे लायंस क्लब लंदन के सदस्य हैं। उनकी संस्था हर साल जालंधर में नेत्र शिविर लगाती है। जल्द ही ये आयोजन झांसी में भी किया जाएगा।
एडिटर अन्सार खान पत्रकार
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